ब्रेकिंग
Narmdapuram कलेक्टर की संजीदगी - साइकिल से दफ्तर पहुंचने वाले आईएएस सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम कलेक्टर Narmadapuram जिले के स्कूलों में अनुरक्षण कार्यो होगा भौतिक सत्यायन सोहागपुर में खुले में गेहूँ उपार्जन करने से सहकारी समितियों का इंकार उमंग सिंगार का आरोप - गेहूं खरीदी में देरी इसलिए की जा रही है ताकि भाजपा के एजेंटों और बिचौलियों को ... नरवाई जलाने वाले किसानों के विरुद्ध कार्यवाई, प्रशासन की चेतवानी के बाद भी जलाई नरवाई JABALPUR - बीपीएल परिवार का आशियाना बचाने छुट्टी के दिन खुले हाईकोर्ट के दरवाजे, कोर्ट ने रोकी बुलडो... RTI जानकारी नहीं देने पर लोक सूचना अधिकारी पर 25 हजार जुर्माना Narmdapuram अमानक पालिथिन का उपयोग करते पाए जाने पर नपा ने किया 11 सौ का जुर्माना Bhopal विजयपुर सीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस- उमंग सिंगार katni - रिश्‍वत मेंं मंहगा मोबाइल फोन मांगना पड़ा भारी, 5 हजार की पहली किश्‍त के साथ लोकायुक्‍त ने द...
आसपास

संसदीय समिति की रिपोर्ट से नोटबंदी की पोल खुली कृषि मंत्रालय के सच से खुला शिवराज का झूठ: कमलनाथ

भोपाल. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि कृषि मंत्रालय की संसदीय समिति की रिपोर्ट से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की पोल खुल गयी। इस गलत निर्णय से देश के करोड़ों लोग तो परेशान हुए ही, किसान सबसे ज्यादा परेशान हुआ। ऐन रबी के सीजन में जब किसान को खाद बीज के लिय नकद राशि की जरूरत होती है तब अचानक नोटबंदी के कारण उनकी नकदी छिन गयी।

कमलनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट से शिवराज सरकार का झूठ भी सामने आ गया है। शिवराज सरकार ने नोटबंदी को किसानों के हित मे बताया था। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में अब ये स्वीकार किया है कि नोटबंदी का फैसला किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हुआ । यदि शिवराज यह जानते थे तो मोदी के सामने चुप क्यों रहे। किसानों ने लाख कहा कि नकदी की कमी से परेशानी हो रही है। लेकिन मोदीजी की दादागिरी के आगे शिवराज सरकार भी चुप रही।

नाथ ने कहा कि शिवराज सरकार ने किसानों से झूठ बोला। किसानों का दर्द सबसे छुपाते रहे। अपना हक मांग रहे किसानों पर शिवराज सरकार ने गोलियां चलवा दीं और। अब वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में कृषि मंत्रालय ने माना है कि नकदी की कमी के चलते लाखों किसान रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके, जिसका उन पर काफी बुरा असर पड़ा।

रिपोर्ट में साफ लिखा है कि नोटबंदी जब लागू हुई, तब किसान या तो अपनी खरीफ की पैदावार बेच रहे थे या फिर रबी फसलों की बुआई कर रहे थे। ऐसे समय में किसानों को नकदी की बेहद जरूरत होती है, पर उस समय कैश की किल्लत के चलते लाखों किसानों की कमर टूट गई।

नोटबंदी के बाद अब खाद बंदी

कमलनाथ ने कहा कि नोटबंदी के बाद प्रदेश में अब खाद बंदी लागू हो गयी है। शिवराजसिंह का इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं है। जगह-जगह से किसानों के सड़क पर उतरने की खबरें आ रही हैं। प्रदेश के कई स्थानों पर किसान यूरिया नहीं मिलने से परेशान हैं और आंदोलन कर रहे हैं। यूरिया एक राष्ट्रीयकृत प्रोडक्ट है, जिसे सरकार बेचती है। लेकिन गेहूं, चने, मटर के लिये यूरिया नहीं मिल रहा है।

डाॅलर के मुकाबले रूपये की कीमत गिरने के कारण चीन, अमेरिका, गल्फ कंट्रीज, मोरक्को आदि से 90 प्रतिशत आयात होने वाला डीएपी और पोटाश की बोरी के दाम भी तीन-चार सौ रूपये बढ़ गये हैं। बारह सौ रूपये प्रति बोरी बिकने वाला डीएपी अब 15 सौ रूपये में बिक रहा है। इसी तरह 624 रूपये बिकने वाला एमओपी 950 रूपये पर जा पहुंचा। एक एकड़ में चार-पांच बोरी खाद लगती है। इस तरह 15 सौ रूपये प्रति एकड़ फसल लागत मूल्य बढ़ गया। अपनी फसल की बर्बादी की आशंका के चलते किसान हलाकान होकर घूम रहा है और निराश है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!