गेंहू उपार्जन – किसानों से वसूली जा रही हम्माली, वारदानों की कमी से खरीदी हुई प्रभावित
गेंहू खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाओ की कमी देखने को मिली, केंद्रों पर भीषण गर्मी में न तो ठंडे पानी की व्यवस्था है और न ही छाया की कोई व्यवस्था की गईं।
नवलोक समाचार,सोहागपुर।
यहां पिछले महीने से चल रही सर्मथन मूल्य पर खरीदी के दौरान कई अनियमिताऐं देखने को मिली है, पहले कम रकवा वाले किसानों की उपज खरीदी गई, जिसके चलते बाद में बड़े किसानों की फसल तौलने की बारी आई तो बाहर से आए हम्माल चले गए, अब स्थानीय हम्मालो से उपज तुलाई का काम करवाया जा रा है. खरीदी केंद्र पर काम कर रहे शोभापुर के हम्मालों ने बताया कि वे साधे किसानों से ही प्रति किवंटल 12 रूपये हम्माली ले रहे है जबकि उपज खरीदने वाली समितियों को प्रसंगिक व्यय के रूप खर्च की राशि दी जाती है.

बता दें कि सोहागपुर ब्लाक में गेहूं की खरीदी के दौरान कई समितियों की लापरवाही देखने को मिली है, सेमरी हरचंद्र में बाहरपुर समिति द्वारा किसानों से प्रति किवंटल सौ रूपये वसूले जाने की जानकारी सामने आई है, वही चना खरीदी के दौरान अमानक उपज भी समितियों द्वारा क्रय किये जाने की सूचनाऐं मिली है, उधर ठीकरी समिति द्वारा ग्राम भौखेड़ी में गेहूं की उपज खरीदी के दौरान हम्माल न मिलने की समस्या सामने आई तो बालाजी और विजय लक्ष्मी वेहर हाउस में किसानो से प्रति किवंटल 12 रूपये हममाली वूसली की जानकारी खुद हम्मालों ने बताई है. सोहागपुर ब्लाक के केंद्रों पर वारदाना भी उपलब्ध न होने से परेशानी देखी गई, वही शासन स्तर से समितियों को दिये गए वारदानों की गुणवत्ता भी खराब होने से स्टेक लगने और तुलाई के बाद वारदाना फट गए जिससे उपज बाहर गिर रही है.
चर्चा इस बात की है कि हम्माल न मिलने से परेशान किसानों ने खुद के ब्यय पर स्थानीय हम्मालों से तुलाई का काम करवाया है. जिसका पैसा भी किसानो ने अपनी जेब से दिया है.
केंद्रो पर व्यवस्थाओं का अभाव
सर्मथन मूल्य पर गेहूं क्रय करने वाली समितियों और वेयरहाउस संचालको द्वारा किसानों को भीषण गर्मी में न तो ठंडे पानी की व्यवस्था की गई और न ही छाया की व्यवस्था की गई, जिससें किसान परेशान हुये. जबकि भीषण गर्मी में प्रशासनिक निर्देश थे कि केंद्र पर स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर पानी, छाया और मेडिकल किट की व्यवस्था रखी जाये लेकिन किसी भी केंद्र पर पर्याप्त व्यवस्था नही की गई.
प्रासंगिक व्यय का खेल.
सर्मथन मूल्य पर खरीदी के दौरान समितियों को प्रति किवंटल निश्चत राशि शासन द्वारा दी जाती है, जिसमें धागा, सिलाई और हम्माली आदि का खर्च शामिल होता है, इसके अलावा समितिायों को कमीशन भी दिया जाता है. जिसका भुगतान सहकारी बैकों के माध्यम से समितियों को किया जाता है. जिसमें बंदरवांट होती है, प्रसंगिक व्यय के कमीशन मामले में पिछले साल जिला सहकारी बैंक मैनेज़र लोकायुक्त के हाथो पकड़ा गया था।





