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अफगानिस्तान में हमारे हित, तालिबान से बातचीत में भारत बाहर नहीं रह सकता: आर्मी चीफ

नई दिल्ली. आर्मी चीफ बिपिन रावत ने दिल्ली में सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पहली बार अफगानिस्तान पर बयान दिया। रावत ने कहा कि अगर भारत का अफगानिस्तान के साथ कोई सरोकार है, तो तालिबान से बातचीत करने वाले देशों में हमें भी शामिल होना होगा।

सेना प्रमुख ने कहा कि अफगानिस्तान के मामलों में भारत की आधिकारिक नीति तालिबान के साथ शामिल नहीं होने की रही है। हालांकि, अमेरिका, रूस, ईरान और पाकिस्तान हमेशा से तालिबान के साथ बातचीत में शामिल रहे हैं।

‘आतंकियों के पास अभी भी घर लौटने का विकल्प’

जम्मू-कश्मीर के मसले पर रावत ने कहा, ‘‘वहां पहले हालात नियंत्रित करने की जरूरत है। हम वहां सख्ती और नरमी दोनों अपना रहे हैं, लेकिन आतंकियों के पास अपने घर पहुंचकर शांति अपनाने का विकल्प अभी भी है। उन्हें देखना चाहिए कि इसका असर किस पर पड़ रहा है? खुद कश्मीरियों पर।”

‘अलगावादियों से साफ कहना- बंदूकें किनारे रखें’

आर्मी चीफ ने कहा, “अलगाववादियों से बातचीत के लिए हमारी शर्त एकदम साफ है। आप बंदूकें किनारे रखिए और पड़ोसी से मदद लेना बंद कर दीजिए। बात सिर्फ तभी होगी जब हिंसा बंद होगी। भारतीय जवान जानबूझकर आम लोगों को निशाना नहीं बनाते। लेकिन आप जानते हैं कि कुछ आतंकी पड़ोस से काम करते हैं और सीमा पार करने की कोशिश करते हैं। इसलिए एक आम नागरिक और आतंकी के बीच फर्क करना काफी मुश्किल होता है।”

डीआरडीओ टारगेट पूरा नहीं करेगा तो हथियार इंपोर्ट करेंगे
रावत ने कहा कि डीआरडीओ हमें फरवरी-मार्च के आखिर तक बता देगा कि वह कब तक मिसाइल और रॉकेटों के आर्डर को पूरा कर सकता है। अगर वह इस बार भी हथियारों की आपूर्ति में नाकाम रहता है तो हमें आयात व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि 20 जनवरी को सेना की उत्तरी कमांड को नई स्नाइपर रायफल मिल जाएंगी।

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