ब्रेकिंग
30 फीट ऊंची दही हांडी फोड़ छिंदवाड़ा टीम बनी विजेता, इनामी राशि बढ़कर पहुंची 57,400 रुपए कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग आभूषण दुकान से अंगूठी चुराने वाली दो महिलाएं गिरफ्तार, 60 हजार का माल बरामद पचमढ़ी में गैंगरेप आरोपियों को कोर्ट ले जाते समय हंगामा बैगा गांवों में दूषित पानी से 7 बच्चों की मौत पर सिंगार ने CM को लिखा पत्र पचमड़ी मानसून मेराथन में शामिल हुए सांसद दर्शन सिंह Sohagpur सीसी रोड का हुआ भूमिपूजन, रामगंज वार्ड को मिली सड़क निर्माण की सौगात भोपाल में फर्जी लोकेशन से लग रही थी अटेंडेंस! सीएमएचओ की बड़ी कार्रवाई, डॉक्टरों और कर्मचारी की सैलर... Bhopal राजधानी के अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, अमानक स्तर पर ... Narmdapuram चरित्र शंका में ढावा संचालक और भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या
Breaking Newsदेश

3 जनवरी 1705 बाबा मोतीराम मेहरा का बलिदान

औरंगजेब के किलेदार वजीर खान ने
परिवार सहित कोल्हू में पीसा था
नवलोक समाचार। बाबा मोतीराम मेहरा , जिनका वर्णन हर सिक्ख ग्रंथ में है । इन्हे सरहिन्द के किलेदार वजीर खान ने परिवार सहित जिन्दा कोल्हू में पीसा था ।
इनकी वीरता और बलिदान का उल्लेख बंदा बैरागी ने किया था । और इनकी स्मृति में एक गुरुद्वारा फतेहगढ़ में बना है । बाबा मोतीराम मेहरा के चाचा हिम्मत राय गुरु गोविन्द सिंह जी के पंच प्यारों में से एक थे सिक्ख बनकर उनका नाम हिम्मत सिंह हुआ ।
इनके पूर्वज जगन्नाथ पुरी उड़ीसा के रहने वाले थे । समय के साथ पंजाब आये और सरहिन्द में नौकरी कर ली । बाबा मोतीराम जी के पिता हरिराम कैदखाने की रसोई घर के इंचार्ज थे । दिसम्बर 1704 के अंतिम सप्ताह गुरु गोविन्द सिंह के चारों साहबजादे शहीद हुये थे । वह 27 दिसंबर 1704 की तिथि थी जब दो दिन की यातनाएं देकर गुरुजी को दो छोटे साहबजादों को जिन्दा दीवार में चुनवाया गया था । और गुरुजी माता गूजरी को अमानवीय यातनायें दी गयीं । वे भी बलिदान हुईं । बाबा मोतीराम का अपराध यह था कि दिसम्बर की बेहद कपकपा देने वाली रात पर जब दो दिन के भूखे साहबजादों को दीवार पर पटका था तब बाबा मोतीराम मेहरा ने साहबजादों और दादी को किसी तरह दूध पहुँचा दिया था ।
साहबजादों और माता गूजरी की शहादत के दो दिन बाद सरहिन्द के किलेदार वजीर खान को यह पता चला कि मोतीराम ने रात में साहबजादों को दूध पहुँचाया था । किलेदार के हुकुम से फौज पूरे परिवार को उठा लाई । माता, पत्नि छै वर्ष की बेटी और मोतीराम को । जबकि पिता और दर्जनों लोगों को वहीं मार डाला गया ।
वजीर खान ने पूछा तो बाबा मोतीराम ने अपना अपराध न केवल स्वीकार किया अपितु गर्व भी व्यक्त किया । इससे क्रुध होकर वजीर खान ने इस पूरे परिवार को जिन्दा कोल्हू में पीसने का हुक्म दिया । वह तीन जनवरी 1705 की तथि थी जब इस परिवार को जिन्दा कोल्हू में पीसा गया ।
हालाँकि इस घटना की तिथियों को लेकर अलग-अलग विद्वानों की की राय में मामूली अंतर आता है । कुछ विद्वानों का मानना है कि बाबा मोतीराम मेहरा और उनके परिवार को 30 दिसम्बर 1704 को पकड़ा गया और एक जनवरी 1705 को कोल्हू में पीसा गया । जबकि कुछ का मानना है कि 30 दिसंबर को वजीर खान को खबर लगी, 31 दिसम्बर को परिवार सहित पकड़ कर लाया गया, एक जनवरी को पेशी हुई और तीन जनवरी 1705 को कोल्हू में परिवार सहित पीसा गया ।

–रमेश शर्मा जी की फेसबुक बॉल से साभार

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!