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प्रदेश को कर्ज में डुबोया शिवराज ने -कमलनाथ

भोपाल. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार उधार लेकर घी पी रही है। पहले से ही लगभग एक लाख 92 हजार करोड़ रूपये के कर्ज में डूबी शिवराज सरकार बाजार से फिर दो हजार करोड़ का कर्जा ले रही है। इसकी पूरी तैयारी कर ली गयी है। प्रदेश में खराब वित्तीय प्रबंधन की अति हो चुकी है। सरकार के पास पेंशन और वेतन बांटने के लिये भी पैसा नहीं बचा। चुनाव के समय जनता को दिखाने शुरू किये गये विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, क्योंकि ठेकेदारों के बिल पैसे की कमी और भ्रष्टाचार के कारण अटके पड़े हैं।
कमलनाथ ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष मंे सरकार पहले ही सात हजार करोड़ रूपये कर्ज ले चुकी है। अब दो हजार करोड़ रूपये फिर से लेने के बाद 2018 में लिये जाने वाले कर्ज की राशि नौ हजार करोड़ रूपये हो जायेगी। सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही थी, लेकिन शिवराजसिंह ने चुनाव आचार संहिता लगने के पहले हजारों करोड़ रूपये की घोषणायें बिना सोचे-समझे कर डाली। वहीं पुराने निर्माण कार्य भी राशि की कमी के कारण अटके पड़े हैं। सरकार का पूरा खजाना खाली पड़ा है। अगली सरकार के लिये खजाने में कुछ नहीं है। वेज एन्ड मीन्स की स्थिति बन चुकी है।
कमलनाथ ने कहा है कि 15 साल पहले जब भाजपा सरकार बनी थी, तब मध्यप्रदेश सरकार पर 20 हजार 147 करोड़ रूपये का कर्जा था। लेकिन 15 सालों में कर्ज की राशि सात गुना से अधिक बढ़ गयी है। फिर भी सरकार कुछ नई बैंकों और संस्थानों से कर्ज लेने की तैयारी में जुटी हुई है। भाजपा सरकार ने विकास कार्यों के नाम पर धड़ाधड़ कर्ज लिया है। मध्यप्रदेश की जनता भाजपा सरकार से हिसाब जानना चाहती है कि अभी तक एक लाख 90 हजार करोड़ में कौन सा विकास हुआ है। कर्ज की राशि का कहां उपयोग व खर्च हुआ? वर्तमान में कुल कितने ब्याज का भार प्रदेश पर है? सिर्फ जनता के साथ धोखा हुआ है। सरकारी खजाने का ज्यादातर पैसा खुद को प्रचार-प्रसार व ब्रांडिंग पर खर्च कर दिया गया।
कमलनाथ ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2003 में एक आरबीएम (फिज़िकल रिस्पांसिबिलिटी एण्ड बजट मैनेजमेंट) एक्ट बनाया था। इसके अनुसार बजट का साढ़े तीन प्रतिशत से अधिक राशि कर्ज के रूप में नहीं ली जा सकती। लेकिन सरकार ने उल्टा सीध गुणा-भाग लगाकर जीडीपी के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर बताये। कहा कि मध्यप्रदेश की जीडीपी साढ़े सात लाख करोड़ रूपये तक पहुंच गयी है। इस आधार पर हर वर्ष कर्ज लेने की पात्रता की सीमा बढ़ गयी।
कमलनाथ ने कहा है कि शिवराजसिंह ने पुरानी घोषणायंे तो पूरी की नहीं और चुनाव को देखते हुए रोज लोकलुभावन घोषणायें कर मतदाताओं को गुमराह और प्रभावित करने में लगी थी। करोड़ों रूपये खुद की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पर खर्च किये गये। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ते कर्ज की स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग को आचार संहिता के चलते नये कर्ज लेने पर अविलंब रोक लगाना चाहिये।

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