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नौरादेही सेंचुरी में 6 माह से साथ-साथ घूम रहे थे बाघ-बाघिन, वन विभाग ने किया मैटिंग का दावा

दमोह। नौरादेही सेंचुरी में नए वर्ष में बाघों का कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। बाघ किशन और बाघिन राधा के बीच मैटिंग होने का दावा किया जा रहा है। यह दोनों पिछले छह माह से साथ-साथ घूम रहे हैं और 20 से 22 जुलाई के बीच मैटिंग होने की बात कही जा रही है। मैटिंग के लिए यह दोनों टाइगर पूरी तरह स्वस्थ हैं।
दरअसल, कान्हा टाइगर रिजर्व से आई बाघिन राधा अब तीन साल की हो गई है और बांधवगढ़ नेशनल पार्क से आया बाघ किशन भी पांच साल का होने वाला है। युवावस्था के चलते वन अधिकारी इनके बीच मैटिंग होने की संभावना जता रहे हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट में अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है। सामान्यतः बाघिन की प्रेग्नेंसी के लक्षण जल्द दिखाई नहीं देते हैं इसके लिए कई महीने लग जाते हैं। जिस तरह बाघ -बाघिन एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ रहे हैं, इससे तो इनके बीच मैटिंग की पूरी संभावना जताई जा रही है।

छह माह में दिखते हैं लक्षण : वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने बताया कि बाघिन की प्रेग्नेंसी के लक्षण करीब छह माह में दिखने लगते हैं, जैसे ही बाघिन की प्रेग्नेंसी के छह माह होते हैं, तो उसका पेट बड़ा दिखने लगता है और वह एकांत तलाशती है प्रेग्नेंसी के दौरान शुरुआत में दोनों एक साथ घूमते हैं लेकिन कुछ समय बाद बाघिन बाघ को भी अपने पास नहीं आने देती है, लेकिन नौरादेही में दोनों अभी साथ-साथ ही घूम रहे हैं और बाघिन की शारीरिक संरचना से भी प्रेग्नेंसी के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, इस वजह से फॉरेस्ट रिपोर्ट में अभी तक बाघिन राधा के प्रेग्नेंट होने की पुष्टि नहीं हो पाई है।

रास आई सेंचुरी: वन अफसरों के अनुसार बाघिन राधा को 18 अप्रैल और बाघ किशन को 1 मई को नौरादेही अभयारण्य में शिफ्ट किया गया था, जब बाघिन राधा आई थी, तब वह ढाई साल की थी, जो अब तीन साल की हो चुकी है, बाघ किशन भी साढे़ चार साल से ज्यादा के हो गए हैं, इन दोनों ने नौरादेही के वातावरण को अपना लिया है और पूरी तरह रम गए हैं हालांकि इन दोनों ने अपना सर्किल एरिया नौरादेही कैंप और उसके आसपास की रेंजों में ही बना रखा है, अभयारण्य की अन्य दूर की रेंजों में यह अभी तक नहीं पहुंचे हैं।

नौरादेही अभयारण्य में दोनों साथ घूम रहे हैं तो इनके बीच मैटिंग के तो पूरे चांस हैं, लेकिन अभी तक की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है। मैं इनकी रिपोर्ट फिर से मंगवाता हूं और स्वयं भी जाकर देखता हूं नौरादेही में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए तो पूरी तरह से प्रयास किए जा रहे हैं।

अंकुर अवधिया, डीएफओ नौरादेही अभयारण्य

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