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अब ई-बुक से पढ़ाई कर सकेंगे छात्र-छात्राएं,

भोपाल. उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों को हाईटेक करने की तैयारी में जुटा है। इसके तहत सभी कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी सेंटर खोले जाने हैं। योजना को मूर्त रूप देने के लिए सभी कॉलेज प्राचार्यों को 19 दिसम्बर तक ऑनलाइन आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इस योजना का मकसद छात्र-छात्राओं को उनके सब्जेक्ट से जुड़ी अच्छे लेखकों की ज्यादा से ज्यादा ई-बुक उपलब्ध कराना है। इन किताबों को छात्र आईडी-पासवर्ड के सहारे कहीं भी पढ़ सकेंगे।
विभाग की इस कवायद के पीछे एक वजह कॉलेज में जगह और कर्मचारियों की कमी को भी माना जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 382 कॉलेजों में पुस्तकालय हैं। लेिकन कर्मचारियों की कमी और देखभाल के अभाव में लगभग 280 कॉलेजों की लाइब्रेरी बदहाल है। भोपाल, ग्वािलयर और इन्दौर के कॉलेजों की लाइब्रेरी में तो दीमक लगने से कई कीमती किताबें खराब हो गई हैं। प्राचार्यों ने इस समस्या से विभाग को अवगत कराया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अंत में स्टाफ की कमी को देखते हुए कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया।

दस लाख छात्रों को होगा फायदा : उच्च शिक्षा विभाग की सभी सरकारी कॉलेजों में ई-लाईब्रेरी सेंटर खोलने की योजना अगर साकार होती है तो इससे प्रदेश के करीब 10 लाख छात्रों को फायदा मिलेगा। वर्तमान पुस्तकालयों में किताबों की चोरी, उनके देखरेख का झंझट खत्म होगा। बताया जाता है कि विभाग अगले शिक्षा सत्र 2019-20 तक ई-लाइब्रेरी का काम पूरा हो जाएगा। इन सेंटर्स की जिम्मेदारी पुस्तकालय विकास समिति को दी जाएगी।

विवि से हुई थी शुरुआत : ई-लाइब्रेरी सेंटर की शुरुआत प्रदेश में विश्वविद्यालयों से हुई है। इसके बाद इसे सरकारी महाविद्यालयों में शुरू किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है िक इस काम के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इस सिस्टम का एक फायदा यह भी होगा कि छात्रों को ई-बुक के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे अपने समय के हिसाब से इन ई-बुक को पढ़ सकेंगे।

प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को ई-लाइब्रेरी सेंटर की स्थापना हेतु आवेदन के लिए 19 दिसम्बर तक का समय दिया गया है। इस योजना के माध्यम से हमारा मकसद मध्यप्रदेश के लाखों छात्रों को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ना है। इससे मौजूदा लाइब्रेरी पर बोझ कम होगा।

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