ब्रेकिंग
पिपरिया : आदमखोर हुआ टाइगर, आदिवासी युवक को बनाया शिकार, मौके पर मौत Pipriya : स्ट्रीट डॉग के हमले से छः साल का मासूम घायल, 30 से ज्यादा बार काटा Narmdapuram : हॉकी टूर्नामेंट, मंडीदीप ने जीता फाइनल मुकाबला Sohagpur करणपुर देव प्राण प्रतिष्‍ठा महोत्‍सव – कलश याञा निकली पचमड़ी की वादियों में गुजेंगा बम बम भोले का जयकारा हॉकी टूर्नामेंट - सोहागपुर और मंडीदीप के बीच होगा फाइनल मुकाबला बैरागढ़ स्‍टेशन पर कछुआ तश्‍कर अरेस्‍ट, 311 कछुओं के साथ रेल्‍वे अटेंडर को आरपीएफ ने दबोचा Narmdapuram इटारसी रेंज में मिला टाइगर का शव, वन विभाग टीम ने किया अंतिम संस्कार किया Sohagpur तेज़ रफ्तार बस पलटने से 31 यात्री घायल, 12 गंभीर यात्रियों को जिला अस्पताल किया रेफर Narmdapuram जिला सहकारी बैंक प्रबंधक 20 हजार की रिश्वत लेते अरेस्ट
क्राइम अलर्ट

चचेरे भाई से शादी की तो मेरे बच्चे पर क्या असर हुआ

रुबा और साक़िब एक ऐसे जीन के साथ ज़िंदगी बिता रहे हैं, जिसकी वजह से होने वाली बीमारी का इलाज मुमकिन नहीं है.

इस जीन की वजह से चार में से एक बच्चे की बचपन में ही मौत हो सकती है.

रुबा और साक़िब पहले ही अपने तीन बच्चों को खो चुके हैं. अब रुबा एक स्वस्थ भ्रूण के लिए आईवीएफ़ की मदद लेना चाहती हैं.

साक़िब अल्लाह भरोसे हैं लेकिन कुछ रिश्तेदार चाहते हैं कि उन्हें अलग होकर दोबारा शादी कर लेनी चाहिए. रुबा छोटी उम्र में शादी नहीं करना चाहती थी.

उन्होंने यूनिवर्सिटी से ए-लेवल करने की तैयारी की हुई थी. लेकिन माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही उनके माता-पिता ने पाकिस्तान में उनकी शादी उनके चचेरे भाई साक़िब महमूद से करवा दी.
रुबा का जन्म ब्रैडफॉर्ड में हुआ और वहीं पली-बढ़ी. शादी से पहले रुबा सिर्फ दो बार पाकिस्तान गई थीं. पहली बार चार साल की उम्र में और दूसरी बार बारह साल की उम्र में.

रुबा को याद भी नहीं था जिससे उनकी सगाई हुई वो कैसे दिखते हैं और रुबा ने उनके साथ कभी अकेले में समय भी नहीं बिताया.

रुबा 17 साल की थीं और साक़िब 27 साल के थे. साक़िब ड्राइवर थे.

वे उस समय को याद करती हैं, ”मैं बहुत ही घबराई हुई थी क्योंकि मैं उन्हें नहीं जानती थी. मैं बहुत ही शर्मीली थी, मैं बहुत ज्यादा बात नहीं करती थी और इससे पहले मुझे कभी लड़कों में रुचि भी नहीं रही. मैं बहुत डरी हुई थी. मैंने अपने माता-पिता से पहले स्कूल पढ़ाई पूरी करने की गुजारिश की लेकिन वो नहीं माने.”

शादी के तीन महीनों बाद वो गर्भवती हो गईं थी. वो जल्द पति के बिना ब्रैडफॉर्ड लौटीं. शादी के इतनी जल्दी गर्भवती होने से वो हैरान तो थीं लेकिन खुशी भी थी.

रुबा ने 2007 में बेटे हसन को जन्म दिया. शुरू में बच्चे को नींद बहुत आती थी और दूध पीने में परेशानी होती थी. रुबा को ये सामान्य बात लगी.

कुछ हफ्तों बाद वो डॉक्टर के पास गईं. डॉक्टर ने जांच की तो उन्हें हसन के कूल्हे सख्त लगे.
रुबा बताती हैं, ”डॉक्टर ने कहा कि वो उसे रेफर कर रही हैं, मुझे लगा कुछ मामूली सा होगा. उन्होंने कुछ टेस्ट किए. मुझे बुलाकर कहा कि इसके रिज़ल्ट के लिए बच्चों के वॉर्ड में चलना होगा”.

“जब मैं अंदर गई तो डॉक्टर ने बताया कि बहुत ही बुरी ख़बर है. उन्होंने मुझे एक पन्ना पकड़ा दिया और कहा कि वो बहुत ही दुर्लभ स्थिति में है. मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं रोने लगी. घर पहुंचते ही मैंने पाकिस्तान अपने पति को फ़ोन लगाया, जिन्होंने मुझे चुप करवाया. उन्होंने मुझे कहा कि हर किसी को कोई न कोई परेशानी होती है और इससे निकलने के लिए हम दोनों साथ में कुछ करते हैं”.

रुबा को ज़रा भी नहीं पता था कि वो और उनके पति आई-सेल के साथ जी रहे हैं. इस जीन की वजह से पैदा हुए बच्चों को ख़तरा रहता है. ये बहुत ही दुर्लभ बीमारी है जो जेनेटिक होती है.

सात महीनों बाद साक़िब को ब्रिटेन के लिए वीज़ा मिल गया, जिससे उन्हें अपने बच्चे को देखने और अपनी गोद में लेने का पहला मौका मिला.

रुबा ने बताया, “साक़िब ने कहा कि ये तो बिल्कुल आम बच्चों की तरह लगता है. न वो बैठ सकता था और न घुटने के बल चल सकता था, लेकिन मेरे पति ने कहा कि कुछ बच्चों को वक़्त लगता है.”

हालांकि वो एक ही उम्र के अपने और दूसरे बच्चों के बीच फ़र्क देख सकती थीं. हसन धीरे-धीरे बढ़ रहा था. छाती में इंफेक्शन के कारण हॉस्पिटल आना जाना लगा रहता था. जैसे-जैसे वो बड़ा हो रहा था उसके सिर का साइज़ भी बढ़ रहा था.

2010 में उनके दूसरे बच्चे अलीशबाह का जन्म हुआ. टेस्ट कराने पर पता चला कि वो भी आई-सेल से पीड़ित है.

2012 में हसन और ठीक एक साल बाद अलीशबाह की भी मौत हो गई. वो सिर्फ तीन साल का था.

तीसरी बार प्रेग्नेंट होने से पहले रुबा ने लीड्ल टीचिंग हॉस्पिटल के मुस्लिम मौलवी मुफ़्ती ज़बैर बट्ट से मुलाक़ात की. वो जानना चाहती थीं कि क्या उनका धर्म गर्भावस्था के दौरान आई-सेल का पता लगा सकता है और उसे पेट में ही खत्म कर सकता है.

उन्होंने रुबा को कुछ भी करने से पहले इसके बारे में अच्छे से सोचने की सलाह दी.

उन्होंने बताया, “मौलवी के बताए अनुसार, आपके पास इनमें से कोई एक स्थिति होगी या तो बच्चा किसी भी हालत में मर जाता है या जल्दी नहीं मरता, इससे उसे कमज़ोरी होगी जो शरीर में आत्मा को प्रवेश करने से पहले उसे ख़त्म करने के लिए काफ़ी है. लेकिन उन्होंने ये भी बताया कि ऐसा नहीं करना चाहिए. उन्हें ऐसा करने का हक़ जरूर है पर इस सच के साथ पूरा जीवन बिताना पड़ेगा कि उन्होंने अपने बच्चे को ख़त्म (अबॉर्ट) कर दिया.”
मौलवी ने रुबा को अपने समुदाय के विचारों को याद करने की सलाह दी. रुबा ने कहा, “इससे निकलना एक बड़ी और व्यक्तिगत चुनौती रहा.”

रुबा ने गर्भपात न करने का फ़ैसला किया.

रुबा तीसरी बार गर्भवती हुईं. 2015 में बेटी इनारा पैदा हुई. उन्होंने इस बार मेडिकल स्कैन नहीं करवाया और डॉक्टर की सलाह को अस्वीकार कर दिया.

वे कहती हैं, “मैं इसे आम प्रेग्नेंसी की तरह जीना चाहती थी. मैं अपने दिमाग में इस बार कोई भी दुविधा नहीं रखना चाहती थी. मैंने गर्भपात नहीं करवाया इसलिए मैं इस प्रेग्नेंसी का आनंद लेना चाहती थी. मैंने अपने पति को बता दिया था कि इस बच्चे को भी वही बीमारी हो सकती है लेकिन उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं. मुझे लगता है मेरे दिमाग में कई संदेह थे- मैं पिछले दो बच्चों की बीमारी को भी जानती थी.”

इनारा भी आई-सेल के साथ पैदा हुई.

रुबा कहती हैं, “मैं सब जानती थी लेकिन जब हमने उसे देखा तो मुझे खुशी थी कि मेरे पास एक बच्चा था.”

साक़िब ने बताया, “मैं दुखी और परेशान था कि हम इतनी सारी प्रेग्नेंसी से गुजरे, लेकिन हम एक स्वस्थ बच्चा चाहते थे. मैं नहीं जानता था कि अभी उसे और कितने दर्द से गुजरना है. मैं उसका आभारी हूं'”.

लगभग एक साल पहले इनारा की दो साल की उम्र में मौत हो गई. पिछले दिसम्बर उसे छाती में इंफेक्शन हो गया था और उसकी हालत तेज़ी से बिगड़ने लगी. उसे ब्रैडफॉर्ड रॉयल इंफर्मरी से यॉर्क ले जाया गया.

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!