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ग्‍वालियर में हिंसा रोकने में लापरवाही पर 3 टी आई को किया गया सस्‍पेंड

ग्वालियर के मुरार, गोला का मंदिर और डबरा थाने के टी आई को एसपी घटना के 25 दिन बाद किया निलंबित

नवलोक समाचार, ग्‍वालियर।

यहां 2 अप्रैल को दलित आदोलन के चलते भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के मामलेम में 3 थाना प्रभारियों को एस पी ने 25 दिन बाद निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि तीनों थाना क्षेत्र में दो अप्रैल को भड़की हिंसा के दौरान पुलिस ने समय पर सुरक्षा के लिए एहतियातन कदम नहीं उठाए थे.जिसके चलते तीनो टी आई दोषी माने गए है। इनकी जगह पर मुरार में मदन मोहन मालवीय, गोला का मंदिर में अमित भदौरिया और डबरा में रमेश शाक्य को जिम्मेदारी दी गई है।

ग्वालियर एसपी आशीष ने प्रेस को बताया कि गोला का मंदिर टीआई अजीत सिंह, मुरार थाने के टीआई अजय पवार और डबरा थाने से अमर सिकरवार को निलंबित कर दिया गया है. एसपी का कहना है कि इन तीनों थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिंसा भड़की थी और पुलिस ने समय रहते हुए एक्शन नहीं लिया. तीनों थाना क्षेत्र के टीआई की लापरवाही सामने आने पर यह कार्रवाई की गई। हम बता दें कि ग्वालियर शहर में भारत बंद के दौरान हजारों लोग लाठी-डंडे लेकर सड़कों पर उतर आए थे. इस दौरान गोला का मंदिर इलाके में प्रदर्शन हिंसक हो उठा था. यहां कुछ लोगों ने पथराव कर कई दुकानों और पेट्रोल पंप में भी तोड़-फोड़ की थई. हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि मौके पर पहुंचे पुलिस बल पर भी उपद्रवियों ने पथराव कर दिया। उपद्रवियों ने मुरार और गोले का मंदिर इलाके में स्कूल बस सहित करीब आधा दर्जन वाहनों को आग लगा दी थी। पुलिस ने उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे, इसके बाद भी हालात काबू में नहीं आए तो कर्फ्यू लगाना पड़ा था. शहर में हिंसा भड़कने के दौरान पांच लोगों की मौत हुई थी।

गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराजगी जताते हुए एससी/एसटी वर्ग ने 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया था। उस वक्त बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें कुछ लोगों को अपनी जान गंवाना पड़ी थी और संपत्ति का भी नुक्सान हुआ था। सूत्रों के मुताबिक बंद के दौरान हिंसा को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई थी।

 

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