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सज्जन कुमार ने सरेंडर किया, कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी

नई दिल्ली. 1984 के सिख विरोधी दंगा केस में दोषी सज्जन कुमार (73 साल) ने सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने उसे मंडोली जेल भेज दिया। कोर्ट ने सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें अलग वैन में जेल ले जाने के आदेश दिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर को सज्जन को आपराधिक साजिश और दंगा भड़काने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी मामले में 10-10 साल की सजा पाए पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर ने कड़कड़डूमा कोर्ट में सरेंडर किया।
यह मामला 1-2 नंवबर 1984 में पालम कालोनी के राजनगर पार्ट-1 में पांच सिखों की हत्या और राजनगर पार्ट-2 में गुरुद्वारा फूंकने से जुड़ा है। पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने सरेंडर के लिए हाईकोर्ट से 30 जनवरी तक का वक्त मांगा था, लेकिन अदालत ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। याचिका में सज्जन ने दलील दी थी कि पारिवारिक मसले, खासतौर से प्रॉपर्टी के मामले सुलझाने के लिए उन्हें वक्त चाहिए।

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था- आखिरकार सत्य की जीत हुई
निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को उन्हें बरी कर दिया था। लेकिन, हाईकोर्ट ने उन्हीं गवाहों के आधार पर सज्जन समेत 6 लोगों को सजा सुनाई थी, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने नकार दिया था। अदालत ने सज्जन के अलावा कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, रिटायर्ड नौसेना अधिकारी कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर को 10-10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने कहा था- दोषियों को राजनीतिक शह प्राप्त थी। पुलिस-प्रशासन भी इन्हें बचाते रहे। आखिरकार सत्य की जीत हुई।

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