
Narmdapuram नगर पालिका की करतूत उजागर, विधानसभा में भेजी झूठी जानकारी, जिम्मेदारो को नोटिस तलब,जांच शुरू
नर्मदापुरम नगर पालिका में आर्थिक गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, दरअसल नगर पालिका की ऑडिट रिपोर्ट और करीब 7 करोड़ 59 लाख रूपये का अंतर सामने आया है, जिसे विधानसभा में उठाने पर गलत जानकारी प्रस्तुत की गईं, अब जिम्मेदारो को नोटिस तलब कर जाँच की जा रही है।
नवलोक समाचार,नर्मदापुरम। मप्र विधानसभा में पूछे गए प्रश्न का भ्रामक जवाब देने पर जांच शुरू होने का मामला सामने आया है। नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र जुलाई 2024 में दिए गए गलत जवाब के संबंध में संचालनालय स्तर पर दल गठित किया गया है। गठित दल के सदस्य गुरुवार 17.12.2025 को नर्मदापुरम नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंचे और संबंधित अधिकारी कर्मचारियों से उनका पक्ष जाना। मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र जुलाई 2024 के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 4239 दिनांक 19.07.2024 से जुड़ा हुआ है। मंडला जिले की बिछिया विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने जुलाई 2024 सत्र में नगरीय विकास एवं आवास विभाग से नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय में हुई आर्थिक अनियमितता की जांच से संबंधित प्रश्न पूछा था। जिसके जवाब में नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी ने आर्थिक अनियमितता को सिर्फ प्रक्रियात्मक त्रुटि बताकर गुमराह करने का प्रयास किया। श्री पट्टा ने नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम द्वारा दिए गए गलत जवाब की शिकायत की है जिसके आधार पर संचालनालय स्तर पर जांच दल गठित किया गया है। जांच दल द्वारा की जा रही जांच से हड़कंप नगर पालिका में हड़कंप मचा हुआ है। जांच की आंच अधिकारी सहित कई कर्मचारियों पर भी आ सकती हैं क्योंकि जांच दल उनसे भी पक्ष ले रहा है जो उक्त कार्यकाल में नर्मदापुरम कार्यालय में पदस्थ थे जिनका स्थानांतरण अन्य जगह हो चुका है। नर्मदापुरम कार्यालय के द्वारा दिए गए भ्रामक जवाब ने प्रशासनिक अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं जो विधानसभा को गुमराह कर सकते है वह आम जनता को कितना गुमराह करते होंगे।
अतारांकित प्रश्न क्रमांक 4239
विधायक नारायण सिंह पट्टा ने विधानसभा सत्र जुलाई 2024 में नगरीय विकास एवं आवास विभाग से नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय में हुई आर्थिक अनियमितता के बारे में पूछा था। प्रश्न क्रमांक 4239 के माध्यम से श्री पट्टा ने नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम की वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी साथ ही ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेखित 7,59,58,524 (7 करोड़ 59 लाख 58 हजार 524) रूपए की आर्थिक क्षति से संबंधित जानकारी मांगी थी।
विधानसभा में नपा ने यह दिया था जवाब
मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 4239 का दिनांक 19.07.2024 को जवाब पेश किया। मंत्री विजयवर्गीय ने नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम द्वारा प्रेषित वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की ऑडिट रिपोर्ट पेश की और उक्त वित्तीय वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट में किसी प्रकार की अनियमितता का उल्लेख नहीं होना बताया गया। मंत्री विजयवर्गीय द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में प्रक्रियात्मक त्रुटि होना बताया, जबकि पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट के एनेक्सजर ए में बकायदा राजस्व वसूली का अंतर दर्शाया गया है।
यह कहती है ऑडिट रिपोर्ट
मध्य प्रदेश विधानसभा में नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम की जो वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की ऑडिट रिपोर्ट पेश की गई उसमें चार वित्तीय वर्ष में 7,59,58,524 रूपए का अंतर दिखाया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2,88,92,984/-, 2020-21 में 2,65,00,997/-, 2021-22 में 5,82,630/-और 2022-23 में 1,99,75,913/- रूपए की राजस्व वसूली का ऑडिट रिपोर्ट के एनेक्सजर ए अंतर दर्शाया गया है। ऑडिटर द्वारा किए गए 4 वित्तीय वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट के एनेक्सजर ए में 7 करोड़ रूपए से ज्यादा की राशि का अंतर बताया गया है लेकिन विधानसभा में उक्त आर्थिक अनियमितता को प्रक्रियात्मक त्रुटि बताना कही ना कही बड़े गबन को छुपाने की ओर इशारा कर रहा है।
जांच प्रतिवेदन में करोड़ों का अंतर
नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय द्वारा विभिन्न करो की जमा रसीद की जांच के लिए कार्यालय के गठित दल ने सीएमओ नर्मदापुरम को अपनी रिपोर्ट पेश की है जिसमें भी राजस्व वसूली में 7,78,91,654/- रूपए का अंतर बताया है। सीएमओ नर्मदापुरम द्वारा राजस्व वसूली की वरिष्ठ स्तर से जांच के लिए संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल संभाग को लिखे गए पत्र क्रमांक 818 दिनांक 28.05.2024 में वित्तीय वर्ष 2020-21 से वर्ष 2022-23 में 7,78,91,654/- रूपए की राजस्व वसूली में अंतर बताया है। ऐसे में दो महीने बाद विधानसभा में दिए गए जबाव में प्रक्रियात्मक त्रुटि बताना अनियमितता छुपाना और विधानसभा को गुमराह करना जाहिर करता है।





