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कमलनाथ सरकार ने आनंद और धर्मस्व विभाग को मर्ज कर बनाया नया अध्यात्म विभाग

भोपाल. कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के 68वें ‘अध्यात्म विभाग’ का गठन करने की घोषणा कर दी। इसमें आनंद विभाग और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग को मर्ज कर दिया है। इस नए विभाग का नाम ‘अध्यात्म विभाग’ रखा गया है। इसमें आनंद विभाग में होने वाले तमाम कामों के साथ धर्म से जुड़े कामों, तीर्थ दर्शन यात्रा व धार्मिक स्थलों का संधारण आदि कार्य होंगे।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस के वचन पत्र के एक और वादे को गुरुवार को पूरा कर दिया। सामान्य प्रशासन विभाग ने अध्यात्म विभाग के गठन की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशन के लिए भेज दी। नया विभाग नर्मदा न्यास, ताप्ती, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी के न्यास का गठन, मध्यभारत गंगाजली निधि न्यास, पवित्र नदियों को जीवित इकाई बनाने के संबंध में कार्यवाही, राम वनगमन पथ में पड़ने वाले अंचलों का विकास सहित धर्मस्व और आनंद विभाग के अधीन आने वाले काम करेगा।

मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ ने अध्यात्म विभाग गठित करने का निर्णय लिया था। जिसे अब मूर्त रूप दिया गया है। इसमें धार्मिक न्यास और धर्मस्व व आनंद विभाग को मिलाया गया है। ये विभाग भारत और प्रदेश की मिश्रित संस्कृति के विकास के लिए काम करेगा। विभाग के अंतर्गत वे सभी अधिनियम और नियम भी आएंगे, जो धर्मस्व विभाग के अधीन आते हैं।

ये काम भी करेगा विभाग

धर्मस्थानों से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों का रखरखाव।
धार्मिक स्थलों पर लगने वाले मेलों और आयोजनों पर भीड़ प्रबंधन एवं सुरक्षा की विशेष व्यवस्थाओं पर सुझाव देना।
प्रदेश और बाहर के चिह्नित तीर्थस्थलों की यात्रा का प्रबंधन।
धार्मिक संस्थाओं की भूमि का प्रबंधन।
पुजारी, महंत और कथावाचकों की नियुक्ति और उनको हटाना।
नगर, शहर और स्थानों को पवित्र घोषित करना।

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