
नरवाई जलाने वाले किसानों के विरुद्ध कार्यवाई, प्रशासन की चेतवानी के बाद भी जलाई नरवाई
बनखेड़ी ब्लाक के ग्रामों में नरवाई जलाने पर 12 के खिलाफ एफआईआर और 62500 जुर्माना
नवलोक समाचार, बनखेड़ी.
जिले में नरवाई (पराली) जलाने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम ठूंठा-दहलवाड़ा में नरवाई जलाने के मामले में 12 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने और कुल ₹62,500 का जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के तहत पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इसी के चलते कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नर्मदापुरम द्वारा 9 मार्च 2026 को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया था, वहीं पिपरिया SDM द्वारा 2 मार्च 2026 को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नरवाई जलाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रशासन द्वारा पिछले एक महीने से लगातार गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा था। दीवार लेखन, ग्राम चौपाल, किसान पाठशालाओं और मीडिया के माध्यम से किसानों को समझाइश दी गई थी कि वे नरवाई को जलाने के बजाय भूसा बनाएं या अन्य सुरक्षित तरीकों से उसका प्रबंधन करें।
इसके बावजूद 2 अप्रैल 2026 को ग्राम ठूंठा-दहलवाड़ा में नरवाई जलाने की सूचना मिलने पर पटवारी, सचिव, रोजगार सहायक, कृषि अधिकारी और कोटवार की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की। जांच में नरवाई जलाने के प्रमाण मिलने पर यह सख्त कार्रवाई की गई।

सख्ती के बावजूद नहीं थम रही नरवाई जलाने की घटनाएं
प्रशासन की सख्ती और लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद जिले में नरवाई जलाने की प्रवृत्ति पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
हालांकि प्रशासनिक प्रयासों के चलते इस वर्ष गौवंश पालकों को कुछ राहत जरूर मिली है। जानकारी के अनुसार अधिकांश पशुपालकों को पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध हो चुका है, जिससे चारे की समस्या कुछ हद तक कम हुई है।
लेकिन यदि जमीनी स्थिति की बात करें तो सोहागपुर, बनखेड़ी और पिपरिया तहसील के कृषि क्षेत्रों में नरवाई जलाने की घटनाएं अब भी सामने आ रही हैं।
यह स्थिति साफ दर्शाती है कि ग्राम स्तर पर कोटवार, कृषि एवं राजस्व विभाग की सख्ती का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है जिसके चलते कई किसान अब भी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।






