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JABALPUR – बीपीएल परिवार का आशियाना बचाने छुट्टी के दिन खुले हाईकोर्ट के दरवाजे, कोर्ट ने रोकी बुलडोजर कार्रवाई

जबलपुर हाईकोर्ट की कार्यवाई

नवलोक समाचार, जबलपुर।

न्यायपालिका की संवेदनशीलता का एक मार्मिक उदाहरण शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को सामने आया, जब अवकाश के दिन भी हाईकोर्ट ने एक गरीब परिवार की गुहार पर तत्काल सुनवाई करते हुए उनके आशियाने को टूटने से बचा लिया। रीवा जिले के चिरहुला गांव निवासी तेजबली सिंह का परिवार, जो गरीबी रेखा (BPL) के अंतर्गत आता है, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कथित कार्रवाई के चलते बेघर होने के कगार पर पहुंच गया था। बिना किसी लिखित आदेश के मकान खाली करने की चेतावनियों के बीच परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रफुल्ल शर्मा ने “स्पेशल रिक्वेस्ट” के माध्यम से तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए 4 अप्रैल को जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने 58×12 फीट (696 वर्ग फीट) भूमि का वैध एलॉटमेंट लेटर (पट्टा) प्रस्तुत किया, जिससे उनके अधिकार की पुष्टि हुई। वहीं, राज्य की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस कार्रवाई के संबंध में कलेक्टर स्तर से कोई ठोस निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, जिससे प्रशासन की स्थिति कमजोर नजर आई।

मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि संबंधित मकान को न तो तोड़ा जाएगा और न ही किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई जाएगी। इस आदेश के साथ ही प्रशासन की प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लग गई और एक गरीब परिवार का आशियाना सुरक्षित हो गया। यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि न्याय केवल प्रभावशाली लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचता है, चाहे उसके लिए कोर्ट को छुट्टी के दिन ही क्यों न खुलना पड़े।

रिपोर्ट – विवेक तिवारी जबलपुर।

Mukesh Awasthi

विभिन्न सामाजिक मुद्दों को सकारात्मक और सामाजिक न्याय की सोच के साथ पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया प्लेटफार्म पर काम कर रहे है।

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