
Narmdapuram कलेक्टर की संजीदगी – साइकिल से दफ्तर पहुंचने वाले आईएएस सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम कलेक्टर
VIP कल्चर से दूर, पर्यावरण और सादगी का संदेश लेकर नर्मदापुरम पहुंचे कलेक्टर सोमेश मिश्रा
नवलोक समाचार,नर्मदापुरम। आज जब प्रशासनिक पदों की पहचान अक्सर लालबत्ती, हूटर और लंबे-चौड़े काफिलों से की जाती है, ऐसे दौर में एक अधिकारी अपनी सादगी, संवेदनशीलता और व्यवहार से अलग पहचान बनाता है। मध्य प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी सोमेश मिश्रा अब नर्मदापुरम के नए जिला कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी पहचान सिर्फ एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे जनसेवक के रूप में बनी है, जिसने पद से ज्यादा मूल्यों को महत्व दिया।
सोमेश मिश्रा उन विरले अधिकारियों में माने जाते हैं जिन्होंने प्रशासनिक गरिमा को दिखावे से नहीं, बल्कि अपने आचरण से परिभाषित किया। मंडला में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने सरकारी गाड़ी और वीआईपी तामझाम से दूरी बनाकर साइकिल से दफ्तर पहुंचना चुना। यह दृश्य सिर्फ एक अधिकारी के दफ्तर जाने का नहीं था, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक था जिसमें सत्ता से ज्यादा सेवा, सुविधाओं से ज्यादा संवेदना और दिखावे से ज्यादा धरातल की सच्चाई शामिल थी।

उनकी यह पहल केवल पर्यावरण बचाने की दिशा में उठाया गया कदम नहीं थी, बल्कि यह आम जनता तक एक गहरा संदेश भी थी कि प्रशासन जनता से दूर नहीं, उसी के बीच है। साइकिल पर निकलने वाला अधिकारी रास्तों की धूल, लोगों की परेशानी, शहर की धड़कन और आम आदमी की तकलीफ को कहीं ज्यादा करीब से महसूस कर सकता है। बंद शीशों वाली गाड़ियों से जो दूरी बन जाती है, सोमेश मिश्रा ने उसे अपनी सादगी से कम करने का प्रयास किया।
मंडला में उनकी कार्यशैली ने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। लोगों ने उनमें एक ऐसे अधिकारी की छवि देखी जो आदेश देने से पहले हालात को समझना जानता है, जो प्रोटोकॉल से पहले इंसानियत को रखता है और जो प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने में विश्वास करता है। यही वजह रही कि उनकी साइकिल सिर्फ एक साधन नहीं रही, बल्कि वह सुशासन, सादगी और संवेदनशील प्रशासन की पहचान बन गई।
सोमेश मिश्रा के व्यक्तित्व का एक और भावपूर्ण पक्ष मां नर्मदा के प्रति उनकी गहरी आस्था है। मंडला की पवित्र धरती पर सेवा देने के बाद अब उनका नर्मदापुरम आना कई लोगों के लिए केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सुंदर संयोग की तरह भी देखा जा रहा है। नर्मदा तट की इस धरती पर एक ऐसे अधिकारी का आना, जो प्रकृति, परंपरा और जनता—तीनों के प्रति सम्मान रखता हो, अपने आप में उम्मीद जगाने वाला है।
नर्मदापुरम में उनके आगमन से लोगों के बीच एक नई उम्मीद जन्म ले रही है—ऐसी उम्मीद, जिसमें कलेक्टर सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि जनता के बीच खड़ा एक भरोसेमंद चेहरा हो। ऐसे समय में जब लोग प्रशासन में सहजता, सुनवाई और संवेदनशीलता की अपेक्षा करते हैं, सोमेश मिश्रा की कार्यशैली उस उम्मीद को मजबूत करती दिखाई देती है।
उन्होंने अपने आचरण से यह साबित किया है कि पद की ऊंचाई सरकारी सुविधाओं से नहीं, बल्कि चरित्र की विनम्रता और सेवा की भावना से तय होती है। साइकिल से दफ्तर पहुंचने वाले इस अधिकारी ने बता दिया कि सच्चा सम्मान सुरक्षा घेरे से नहीं, बल्कि लोगों के दिलों से मिलता है।
अब नर्मदापुरम की जनता की निगाहें अपने नए कलेक्टर पर हैं। उम्मीद है कि सादगी, पर्यावरण प्रेम और जनसरोकारों से जुड़ी उनकी पहचान इस जिले में प्रशासन का एक नया अध्याय लिखेगी।





